परीक्षा में सफलता के रहष्य जानकर दूसरों से आगे बढ़ें

परीक्षा में सफलता के रहष्य क्या हैं? ये जानने वाला बहुत ही आसानी से परीक्षा में सफलता प्राप्त लेता है। और जो इन रहष्यों को नहीं जनता वो बहुत मेहनत कर के भी परीक्षा में वांछित सफलता प्राप्त नहीं कर पता। इसलिए किसी भी परीक्षा की तैयारी करने के लिए आपको पहले इन रहष्यों को जान लेना चाहिए।

परीक्षा में सफल होने के लिए कठिन परिश्रम (Hard Work) और स्मार्ट वर्क (Smart Work) दोनों की आवश्यकता होती है। यदि आप सिर्फ कठिन परिश्रम करते हैं तो आपको पढाई के लिए अत्याधिक समय देना पड़ेगा और हो सकता है कि पढाई के अलावा आप अन्य चीजों में पिछड़ जाएँ। यदि आप सिर्फ स्मार्ट वर्क करते हैं तो आप बहुत अधिक अंक प्राप्त नहीं कर पाएंगे और हो सकता है की परीक्षा में आपके साथ धोखा हो जाय।

इसलिए परीक्षा में अपार सफलता के लिए hard work और smart work का combination बहुत जरूरी है। इस लेख में मैं आपको कुछ ऐसे ही टिप्स देने वाला हूँ जो इन दोनों प्रकार के तरीकों का प्रयोग कर परीक्षा में आपको अपार सफलता दिलाएँगे।

समय का सदुपयोग करें

आपका समय बहुमूल्य है इसे व्यर्थ न गवाएं।

मनुष्य के पास समय सिमित होता है और जो चीज सिमित होती है उसका मूल्य बहुत अधिक होता है। हर एक छात्र के पास प्रतिदिन सामान समय २४ घंटे होते हैं। अब उसी सामान समय में कोई टॉप करता है और कोई फेल हो जाता है। तो फिर समय सामान होते हुए भी एक सफल विद्यार्थी और एक असफल विद्यार्थी में क्या अंतर होता है?

मनुष्य के पास सदा से ही अपने समय को व्यतीत करने के तमाम साधन रहे हैं। आज शायद कुछ ज्यादा ही हैं जैसे आज के छात्र के पास TV, लैपटॉप, स्मार्ट फोन, अखबार इत्यादि समय बर्बाद करने के साधन हैं। इन समय बर्बाद करने वाले साधनों का उपयोग कम कर आप उस समय का सदुपयोग पढाई के लिए कर सकते हैं। अर्थात आप अपने पढाई का समय बढ़ा कर सफलता की ओर बढ़ सकते हैं। आप तय कर लीजिए की आपको कितने घंटे पढना है और इन चीजों का समय काम कर के पढाई में लगाइए।

समय के सदुपयोग का स्मार्ट तरीका है कि आप अपनी कक्षा के समय का पूरा उपयोग करें। जब शिक्षक कक्षा में पढ़ाते हैं तो कई छात्र आपस में बातें करने में या इधर उधर करने में क्या पढ़ाया जा रहा है उस पर ध्यान नहीं देते। यह भी समय का दुरुपयोग है। जब शिक्षक कक्षा में पढ़ा रहे हैं तो उसे ध्यान से समझिए और जो समझ में ना आये उसे तुरंत पूछिए। कई छात्र कुछ समझ में ना आने पर संकोचवश उसे शिक्षकों से पूछते नहीं हैं। स्मार्ट का एक अर्थ बेशर्म भी होता है इसलिए याद रखें

जिसने की शर्म उसके फूटे कर्म।

इसलिए स्मार्ट बनिए यानिकी कक्षा का कक्षा में ही समझिए और जो न समझ आए बेशर्मी से पूछिए।

लगातार आगे बढ़ते रहें

कछुए और खरगोश की कहानी तो आपने सुनी होगी। इस कहानी में कछुआ भले ही धीरे-धीरे लेकिन लगातार आगे बढ़ता रहता है जबकि खरगोश तेजी से दौड़कर थक जाता है और फिर रुक जाता है आराम करने के लिए। और जब वह आराम करके उठता है तो कछुआ जीत चुका होता है। हालांकि यह एक काल्पनिक कहानी है लेकिन वास्तविक जीवन में भी सत्य है।

उदाहरण के लिए कभी आपने मैरॅाथन धावकों को देखा है, वो धीरे-धीरे ही सही लेकिन लगातार दौड़ते रहते हैं और केवल अंतिम १०० या २०० मीटर तेज दौड़ते हैं।

परीक्षा में सफलता के लिए भी ठीक यही strategy काम आती है। आप अपनी क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे ही सही पर लगातार आगे बढ़ते रहें। कई छात्रों की आदत होती है कि वे प्रतिदिन तो नहीं पढ़ते पर टेस्ट या एग्जामिनेशन के पहले टाइम टेबल बना कर बहुत अधिक मेहनत करने की कोशिश करते हैं। और परिणाम हमेशा साधारण मिलता है। और एक विषय के टेस्ट में अगर वे सफल हो भी जाएँ तो भी इसकी वजह से अन्य विषयों की पढाई अस्त-व्यस्त हो जाती है, उनका सोना, खाना-पीना या अन्य काम अस्त-व्यस्त हो जाते हैं। परीक्षा में अपार सफलता प्राप्त करना किसी भी प्रकार से टेंशन की बात नहीं होनी चाहिए और यदि हर बार परीक्षा या टेस्ट आपके लिए टेंशन भरा होता है तो आप खरगोश की तरह दौड़ रहे हैं कछुए की तरह नहीं।

किसी भी कक्षा या विषय का सिलेबस बहुत सोच समझ कर बनाया जता है। और इसको पूरा करने का समय भी एक सामान्य (Average) छात्र के हिसाब से होता है। आपको थोड़ा कम या ज्यादा समय लग सकता है पर यह अंतर (Variation) बहुत अधिक नहीं होता। इसका मतलब अगर आप लगातार आगे बढ़ते रहते हैं तो सिलेबस पूरा करना आपके लिए किसी भी प्रकार से बोझ नहीं हो सकता।

परीक्षा का डर निकालिए

अगर आपको परीक्षा से बहुत डर लगता है। परीक्षा का नाम सुनते ही आपकी हालत खराब हो जाती है और आप टेंशन में आ जाते हैं, आते हुए उत्तर भी भूल जाते हैं या फिर समय ही नहीं बचता उन उत्तरों को लिखने के लिए। तो आपकी सारी मेहनत बर्बाद हो जाती है और यह बहुत ही दुखद है।

इसका कारण यदि विषय की पर्याप्त तैयारी का ना होना है तो इसका उपाय लगातार आगे बढ़ते रहना ही है। और यदि यह जेनुइन डर है तो इसका उपाय है की आप इस डर से लड़िए और इसे जीत लीजिए।

मित्रों डर के विषय में चाणक्य ने कहा है

“भय को पास न आने दो और जैसे ही वो पास आए उसपर आक्रमण कर उसे समाप्त कर दो।”

“As soon as the fear approaches near, attack and destroy it.”

अर्थात् परीक्षा के डर को निकालना है तो आप बार-बार परीक्षा दीजिए। परीक्षा की तयारी के लिए आप ज्यादा से ज्यादा मॉडल पेपर हल करें। इससे आपको उस विषय की परीक्षा का अभ्यास हो जाएगा और आप वास्तविक परीक्षा में होने वाली घबराहट और इस घबराहट से होने वाले नुकसान से बच जायेंगे।

यदि आपकी परीक्षा एकदम पास आ गयी है तो जरूर पढ़े परीक्षा सिर पर है अब पढ़ाई कैसे करें

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One Comment

  1. आपकी यह लेख मेरे लिये बहुत मददगार साबित हुई
    सर. इसे पढकर मेरे परीक्षा का डर निकल गया.
    इस लेख को पोस्ट करने के लिए धन्यवाद..

    http://succezz4life.blogspot.com

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