सफलता के मूल मंत्र

मित्रों सफलता कोई ऐसी वस्तु नहीं है जो तुरंत प्राप्त की जा सके। यह एक सतत प्रक्रिया होती है जिसके लिए हमें निरंतर सही दिशा में प्रयास करने पड़ते हैं। सफलता की सीढियां चढ़ कर हम अचानक ऊपर नहीं पहुँच जाते बल्कि इसके लिए हमें एक एक पायदान चढ़ना होता है।

सफलता के स्वप्न तो हर कोई देखता है, पर सफलता के लिए जो सतत प्रयास करने पड़ते हैं वो कोई नहीं करना चाहता और परिणाम स्वरुप असफलता ही उनके हाथ लगाती है। फिर लोग अपने भाग्य को कोसना शुरू कर देते हैं और सफल लोगों के भाग्य से जलने लगते हैं। मित्रों यदि भाग्य होता है तो आप कोई भी चेष्टा ही क्यों करते हैं? जैसे कि आप भूख लगने पर खाना क्यों खाते हैं? यदि आपके भाग्य में होगा तो आपका पेट स्वयं भर जाएगा। चलिए मान लेते हैं कि भाग्य होता है और भाग्य में जो लिखा होता है उसे कोई नहीं बदल सकता। तो फिर सवाल उठता है कि क्या आप जानते हैं की आपके भाग्य में क्या लिखा है? इसका जवाब है नहीं।

मित्रों भाग्य का होना या ना होना उतना बड़ा सवाल नहीं है। सवाल है कि हम क्या बदल सकते हैं और क्या नहीं? जो चीजें हम नहीं बदल सकते उनके विषय में चिंता करके क्यों हम अपना ब्लड प्रेशर (blood pressure) बढ़ाएं?

हमें सिर्फ़ उन चीजों पर ध्यान केन्द्रित(focus) करना चाहिए जिन्हें हम बदल सकते हैं।

We should focus on things we can change.

सफलता की राह में हमारी दो अड़चने हैं।

पहला हम उन चीजों का रोना रोते हैं जिन्हें हम बदल नहीं सकते। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है बीता हुआ समय। मित्रों बीते हुए समय का रोना रोते हुए बहुत से लोगों को आपने सुना होगा अब सवाल यह उठता है की बीते समय की घटनाओं को क्या हम बदल सकते हैं? यदि नहीं तो बीते दिनों पर आपना समय न व्यर्थ गवाँए और आगे बढ़ जायें। इसी प्रकार हम दूसरों को बदलने की कोशिश में भी अपना समय गँवा देते हैं जबकि हमें अपने आप को बदलने का प्रयास करना चाहिए।

दूसरा हम उन चीजों को भी अपरिवर्तनीय मान लेते हैं जिन्हें हम बदल सकते हैं। जैसे कि हमारी बुरी आदतें। मित्रों बुरी आदतों को अच्छी आदतों से बदलना आपको सफलता के करीब ले जायेगा।

यदि आप हर बार क्या बदल सकते हैं और क्या नहीं इसकी सही पहचान कर सकें और जिसे बदल सकते हैं उसी पर focus करें तो आपकी सफलता की राह आसान हो जायेगी।

मित्रों यह लेख आपको कैसा लगा हमें कमेंट के द्वारा बताइये।

One Comment

  1. बहुत अच्छा लेख ! विफलता का सामना करके भी आगे बढ़ना चाहिए तथा विफलता को मेहनत करके सफलता में बदल देना चाहिए। बहाने नहीं बनाने चाहिए।

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